Cheetah in Bharat: 20 जनवरी को दक्षिण अफ़्रीका से लाए जा सकते है 12 चीते

Cheetah in India: नामीबिया से आठ चीतों को लाने और उन्हें सफलतापूर्वक मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान के बड़े बाड़ों में छोड़ने के बाद अब दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते लाए जाने की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। भारत सरकार ने मध्य प्रदेश के वन अधिकारियों से 20 जनवरी को चीतों के स्वागत की तैयारी करने को कहा है। चीतों को लाने के लिए केंद्रीय वन महानिदेशक चंद्रप्रकाश गोयल, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के सदस्य सचिव एसपी यादव सहित केंद्रीय वन मंत्रालय के अन्य अधिकारी 15 या 16 जनवरी को दिल्ली से दक्षिण अफ्रीका रवाना होंगे। कोई अड़चन नहीं आई तो वे 20 जनवरी को चीते लेकर ही लौटेंगे।

चीते दिल्ली और ग्वालियर के रास्ते ही कूनो राष्ट्रीय उद्यान लाए जाएंगे। बता दें, इससे पहले अफ्रीकी देश नामीबिया से लाए गए आठ चीतों को 17 सितंबर, 2022 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कूनो में छोड़ा था। दक्षिण अफ्रीका से चीते लाने की कोशिश अक्टूबर, 2022 से चल रही है पर वहां के राष्ट्रपति की अनुमति नहीं मिल पा रही थी। अब राष्ट्रपति ने सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। अनुबंध की प्रक्रिया भी अगले दस दिनों में पूरी की जा सकती है। वहां के अधिकारियों के सकारात्मक रुख को देखते हुए भारत सरकार ने अपने अधिकारियों को भेजने का निर्णय लिया है।

उम्मीद की जा रही है कि दक्षिण अफ्रीका में ही अनुबंध की औपचारिकता पूरी कर ली जाएगी और अधिकारी चीते लेकर ही वापस आएंगे। उल्लेखनीय है कि पहले दक्षिण अफ्रीका एवं नामीबिया से एक साथ चीते लाने की योजना थी, इसलिए दक्षिण अफ्रीका में भी 12 चीतों को अगस्त, 2022 में ही क्वारंटाइन कर दिया गया था। बाद में राष्ट्रपति की मंजूरी नहीं मिली, तो मामला टलता रहा।

डा. झाला परियोजना से बाहर

अधिकारियों की आपसी नाराजगी के चलते चीता परियोजना के मुख्य किरदार और भारतीय वन्यजीव प्रबंधन संस्थान देहरादून के विज्ञानी डा. वायवी झाला को इस परियोजना से बाहर कर दिया गया है। डा. झाला दक्षिण अफ्रीका नहीं जा रहे हैं। जबकि वे ही पहले दिन से चीता लाने के लिए वहां के अधिकारियों से बात करते रहे हैं। इतना ही नहीं, चीतों की मेजबानी करने वाले मध्य प्रदेश के वन अधिकारियों को भी इस दल में शामिल नहीं किया गया है।

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